शनिवार, 31 मार्च 2012

.हम सिर्फ गुजरात दंगे  की  क्यों  बात  करते  हैं  ...ऐसे  कई  दंगे  है  जिनका  मै जिक्र नहीं करूँगा पर उसमे सैकड़ों हिन्दू मारे गए ...आज भी मऊ दंगो में कई हिंदूं बेटियां नहीं मिली जिसको बीते ३ साल से भी ज्यादा हो गएँ हैं ! हम कब तक एक दुसरे को इल्जमियत की टोपी पहनते रहेंगे ....क्या किसी भी दंगे की लिए सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार होते..हम कब सीखेंगे अपनी कमियौं  को अपनाना !




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हमारा देश वाकई टाटा चाय की भांति उबलता है , रंग भी आता है  और थोड़ी देर बाद ठंडा भी हो जाता है पर जब दुबारा उबलने के लिए रखते हैं तो स्वाद ही बेस्वाद हो जाता है....तो सोचिये जरा हमें टाटा चाय की तरह उबलना है या उस उबाल  को बरकरार रखना है सूर्य की भांति जिसमे ...आपराध ,भ्रष्टाचार और गरीबी जैसी गन्दगी को जला के राख कर दें ।

सोमवार, 26 मार्च 2012

आज के इस युग हम इतने बाहुबली और विद्वान् हो गए हैं की भारत का निर्माण हम फसबूक में status अपडेट मात्र से ही कर देते हैं ।

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

किसी भी रिश्ते की बुनियाद बनाने के लिए तर्क की नहीं समर्पण की आवश्यकता हैं । जिस प्रकार भक्ति में तर्क करने से इश्वर का स्वरुप पत्थर लगाने लगता है ठीक उसी प्रकार रिस्तो में तर्कता की प्रधानता देने पर रिश्ते अपने मौलिकता को खोने के साथ अमानवता का रूप लेने लगते हैं.....